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Monday, 29 December 2014

विदेह जीवन

देखता हूं रक्त में प्रवाह
समय से आगे
जैसे
ठहर गया हो समय
और
रक्त धमनी और शिराओं की सीमा
लांघ कर
बहना चाहता है
उन्मुक्त/
रक्त का अवरोध जीवन है?
या रक्त से विरक्त
होकर बह निकलना
होना विदेह
या दुनिया से विरत!
जीवन की सीमाओं से परे
देह और रक्त के संबंधों से विलग
जीवन है निस्सीम!13-12-2014